Life

  • November 30, 2019

आसमान में उड़ने वाले जरा ये खबर भी रख……
जन्नत पहुँचने का रास्ता मिट्टी से ही गुजरता है……

अपने वजूद पर इतना न इतरा….ए ज़िन्दगी….
वो तो मौत है जो तुझे मोहलत देती जा रही है…..

“लफ्ज् दिल से निकलते हैं
दिमाग से तो मतलब निकलते है.”..

वो किताबों में दर्ज था ही नहीं ……
सिखाया हमें जो सबक ज़िंदगी ने …….

अगर जिंदगी मे कुछ पाना हो तो तरीके बदलो,
ईरादे नही..

मुस्कुराने के बहाने जल्दी खोजो ,
वरना जिन्दगी रुलाने के मौके तलाश लेगी .

तुम्हारी शर्तो से शहेनशाह बनने से बहेतर है…
की अपनी शर्तो पे फ़क़ीर बन जाऊँ …..

अक्सर वही लोग उठाते है हम पर उंगलिया,
जिनकी हमें छूने की औकात नहीं होती।।

जब तक हम ये जान पाते हैं कि ज़िन्दगी क्या है
तब तक ये आधी ख़तम हो चुकी होती है.

राजा का बेटा भले ही नंगा पैदा हो……
पर होता वो राजकुमार ही है…..

युं तो गलत नही होते अंदाज चहेरों के; लेकिन लोग…
वैसे भी नहीं होते जैसे नजर आते है…..

मुझे एक ने पूछा “कहा रहते हो ” मैने कहा “औकात मे” साले ने
फिर पूछा “कब तक ?” मैंने कहा “सामने वाला रहे तब तक”

खेल ताश
का हो या जिंदगी का ,
अपना इक्का तब ही दिखाना
जब सामने बादशाह हो ।

महसूस जब हुआ कि सारा शहर,
मुझसे जलने लगा है,
तब समझ आ गया कि अपना नाम भी,
चलने लगा है |

तेरी गली मे रहने वालो से कह दो की अपनी “औकात” मे रहे |

शायरी का बादशाह हुं और कलम मेरी रानी,
अल्फाज़ मेरे गुलाम है, बाकी रब की महेरबानी ।

अकल कितनी भी तेज ह़ो नसीब के बिना नही जित सकती , बिरबल काफी अकलमंद होने के बावजूद..
कभी बादशाह नही बन सका ।

नवाबी तो हमारे खुन मे है पर पता नही
ये दिल कैसे तेरी गुलामी करना सीख गया….

तुम खुश-किश्मत हो जो हम तुमको चाहते है…वरना,
हम तो वो है जिनके ख्वाबों मे भी लोग इजाजत लेकर आते है…..

आज़ाद कर दूंगा तुमको अपनी मुहब्बत की क़ैदसे ,
करे जो हमसे बेहतर तुम्हारी क़दर पहले वो शख्स तो ढूँढो…

वो अल्फ़ाज़ ही क्या,
जो समझानें पडे हमने मुहब्बत की है,
कोई वकालत नहीं ……

तू मुहब्बत से कोई चाल तो चल,
हार जाने का हौसला है मुझ में…

दूर हो जाने की तलब है तो शौक से जा…
बस याद रहे की मुड़कर देखने की आदत इधर भी नही…….

तुझे तो हमारी मोहब्बत ने मशहूर कर दिया बेवफ़ा ….
वरना तू सुर्खियों में रहे तेरी इतनी औकात नहीं…….